वाराणसी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है। यहां हर मोड़ पर एक शिवालय, हर गली में कोई देवता विराजमान हैं। पर क्या आप जानते हैं कि काशी में कुछ ऐसे भी मंदिर हैं जहां आज भी भगवान तो हैं, लेकिन भक्त नहीं पहुंचते? ये वो मंदिर हैं, जो समय की धूल में कहीं खो गए हैं… भीड़-भाड़ से दूर, गूगल मैप्स से बाहर, इन मंदिरों में अब सन्नाटा बोलता है।

1. रत्नेश्वर महादेव (Leaning Temple of Varanasi)
मणिकर्णिका घाट पर पानी में आधा डूबा यह मंदिर सदियों से खड़ा है। लोग फोटो तो खींचते हैं, पर अंदर जाने का कोई रास्ता नहीं। कहते हैं, यह मंदिर एक सेविका ने अपनी माँ के नाम पर बनवाया था, और भगवान आज भी उसी ममता के इंतज़ार में हैं।
2. भैरव कुण्ड के पीछे स्थित वीरभद्र मंदिर
काल भैरव की छाया में छुपा एक वीरभद्र मंदिर है, जो गली के मोड़ पर है लेकिन नज़र से ओझल। यहां कोई आरती नहीं होती, बस वक्त की खामोशी है।
3. लोलार्क कुंड के पास का निर्जन सूर्य मंदिर
लोलार्क कुंड के पास एक पुराना सूर्य मंदिर है, जो अब टूटी दीवारों और सूखे फूलों का घर बन गया है। कभी यहां सूर्य की पहली किरण पड़ती थी, आज वो रुकती नहीं।
4. पंचगंगा घाट का नृसिंह मंदिर
नदी किनारे का यह मंदिर अब एक वीरान चौक की तरह है, जहाँ भक्तों के बजाय समय का बहाव रुका है।
5. मणिकर्णिका के पीछे का तारा मंदिर
मणिकर्णिका घाट के पीछे छिपा यह छोटा सा तारा माता का मंदिर, चुपचाप सब देखता है। शायद इस इंतज़ार में कि कोई फिर से दीप जलाए।काशी सिर्फ वो नहीं जो दिखता है.. असली काशी तो वहां है जहां भगवान अब भी राह ताक रहे हैं…क्या आप वहाँ कभी गए हैं?
