घाटों से निकलो, पहाड़ों की ओर। चलो बनारस से कुछ दूर के 5 हसीन पहाड़ी ठिकाने, जहां झरनों की आवाज़ दिल छू लेती है…काशी की गलियों में भले ही इतिहास बसता हो, लेकिन अगर आपका मन पहाड़ों और झरनों की ओर भाग रहा है, तो आपको ज़्यादा दूर जाने की ज़रूरत नहीं। वाराणसी के आसपास कुछ ऐसे शानदार प्राकृतिक स्थल हैं जहाँ पहाड़ की ठंडक, झरनों का संगीत और हरियाली की नमी एक साथ मिलती है।

1. राजदरी – देवदरी जलप्रपात (चंदौली, 70 किमी दूर)
ये दो झरने पहाड़ी जंगलों के बीच बसे हैं। यहाँ का पत्थरीला रास्ता, हरियाली से घिरा पहाड़ी घाट और गिरते पानी की गूंज — सब मिलकर एक ऐसी जगह बना देते हैं जो तस्वीरों से कहीं ज़्यादा खूबसूरत लगती है।
2. विजयगढ़ किला और झरना (चंदौली के जंगलों में छिपा खजाना)
यहाँ तक पहुँचना थोड़ा रोमांच से भरा है। ऊँचाई पर बसा यह किला इतिहास से भरा है, और इसके नीचे बहता झरना आपको थकान से आज़ादी देता है। बहुत कम लोग यहाँ जाते हैं — एकदम छुपा हुआ रत्न।
3. टोंस फॉल्स (मिर्जापुर, लगभग 90 किमी दूर)
यह झरना पहाड़ी ढलानों से गिरता है, और नीचे एक छोटा सा प्राकृतिक कुंड बनाता है। यहाँ के चारों तरफ फैले जंगल और चट्टानें आपको एक ट्रैकिंग-ट्रिप जैसा एहसास देंगे।
4. विन्ध्याचल की पहाड़ियाँ – गुप्त गोदावरी और प्राकृतिक गुफाएँ
विन्ध्याचल सिर्फ धार्मिक कारणों से नहीं, बल्कि अपने आसपास की पहाड़ियों और छोटी गुफाओं के लिए भी जाना जाता है। यहाँ कुछ ऐसी जगहें हैं जहाँ झरनों की आवाज़ गुफाओं की गहराई से टकराकर गूंजती है।
5. चुनार किला के पीछे का जंगल और हिडन वॉटरफॉल
चुनार किला तो सब देखते हैं, लेकिन उसके पीछे का छोटा पहाड़ी इलाका और वहाँ छिपा हुआ एक छोटा सा झरना — बस कुछ स्थानीय लोग ही जानते हैं। यह जगह ट्रैकिंग के लिए परफेक्ट है, और वहाँ से दिखता गंगा का नज़ारा दिल चुरा लेता है।
काशी में मोक्ष है, लेकिन इसके आसपास प्रकृति का संगीत भी है।अगर थक चुके हो जीवन की दौड़ में — तो इन पहाड़ों की शरण में ज़रूर जाना।
